The News Point: वाराणसी में आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा के जनसेवा अभियान को नई मजबूती मिली है. राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल और NIMA सर्जिकल सोसायटी, यूपी चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय सुश्रुत कॉन 2026 का भव्य समापन हुआ. इस दौरान 25 जरूरतमंद मरीजों के निशुल्क ऑपरेशन किए गए और उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराई गईं.
सुश्रुत, जिन्हें विश्व का प्रथम शल्य चिकित्सक माना जाता है, उनकी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वाराणसी में आयोजित सुश्रुत कॉन 2026 समाज सेवा का बड़ा माध्यम बनकर सामने आया. दो दिनों तक चले इस आयोजन में सर्जरी से जुड़ी आधुनिक और आयुर्वेदिक तकनीकों का समन्वय देखने को मिला.
शिविर में कुल 25 निशुल्क शल्यकर्म सफलतापूर्वक संपन्न किए गए. इनमें पाइलोनाइडल साइनस की लेजर सर्जरी, फिस्टुला इन एनो, बवासीर, फिशर, हाइड्रोसील तथा हेमाटोसील जैसे जटिल रोगों के ऑपरेशन शामिल रहे. मरीजों को न केवल निशुल्क उपचार मिला बल्कि परामर्श और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं.
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. डी. के. मौर्य ने की. वहीं देशभर से आए विशेषज्ञ शल्य चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं देकर आयोजन को सफल बनाया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में NCISM के सदस्य डॉ. के. के. द्विवेदी उपस्थित रहे. उन्होंने खाए कि आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा आज भी समाज के लिए अत्यंत उपयोगी है. ऐसे निशुल्क शिविर आम लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं.
आयोजकों का कहना है कि सुश्रुत कॉन का उद्देश्य केवल उपचार प्रदान करना नहीं, बल्कि लोगों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना और जरूरतमंद मरीजों तक समय पर सर्जिकल सुविधाएं पहुंचाना भी है. अस्पताल प्रशासन, नर्सिंग स्टाफ और चिकित्सकीय टीम के समन्वित प्रयासों से यह आयोजन पूरी तरह सफल रहा.
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सर्जन डॉ. आलोक गुप्ता, प्रोफेसर डॉ. पी. हेमंत कुमार, डॉ. अशोक कुमार विश्वकर्मा, प्रोफेसर डॉ. सुमन यादव, डॉ. मृगांक शेखर, प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मण सिंह, डॉ. अरुण दत्त राजोरिया और डॉ. श्रुति सिंह शामिल रहे.


