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सख्ती : पराली जलाने वालों किसानों के खिलाफ पुलिस सख्त, सीताराम यादव गिरफ्तार, अन्य किसानों पर भी लटकी कार्रवाई की तलवार

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चन्दौली : जिले में पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ पुलिस सख्ती के मूड में है. इसी क्रम में अलीनगर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक किसान को गिरफ्तार किया है. आरोपी के खिलाफ पुलिस विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कार्रवाई में जुटी है.

बताते है कि जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में खेतों में पराली जलाने के कारण फसलों में आग लगने की घटनाएँ लगातार घटित हो रही थी. जिससे कि किसानों की फसलों का लगातार नुकसान हो रहा था और जान माल की क्षति की भी सम्भावनायें बनी हुई थी. ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने व लोगों की जान माल की क्षति को बचाने के लिये पूर्व में डा. अनिल कुमार पुलिस अधीक्षक चन्दौली महोदय द्वारा पराली जलाने की घटना में शामिल व्यक्तियों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया था.

 इसी क्रम में अलीनगर थाना क्षेत्र के गुवास में एक गेहूं के खेत में आग लगने की सूचना प्राप्त हुई , सूचना पर अलीनगर पुलिस द्वारा तत्काल मौके पर पहुंच कर उपलब्ध संसाधनों व फायर ब्रिगेड के सहयोग से आग पर काबू पाया गया. आग के कारणों के सम्बन्ध में जांच में पाया गया कि सीताराम यादव पुत्र स्व. बसन्तू यादव द्वारा अपने खेत में पराली जलाया गया था. जिससे कि आग फैल गयी और बेकाबू हो गयी. जिसमें लोगों की फसल का नुकसान हुआ व जीवन संकट में पड़ गया था. गिरफ्तारी के आधार पर थाना अलीनगर पर मु0अ0स0 69/24 धारा 278/285/188/427 भादवि पंजीकृत कर अग्रिम कार्यवाही की जा रही है.

पुलिस ने बताया कि प्रशासन की चेतावनी के बावजूद लोग धड़ल्ले से पराली जला रहे है. इन लोगों ने सोचा था कि हर बार की तरह इस बार भी कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन इस बार प्रशासन से हवा में प्रदूषण की मात्रा बढ़ने को गंभीरता से लिया है. पराली जलाने की शिकायतों के अनुसार तहसील स्तरीय/ थाना स्तरीय टीमें सर्वे कर रही हैं और अभियोग पंजीकृत करने के साथ जुर्माना वसूलने के लिए नोटिस भेजने की प्रक्रिया जारी है.

पुलिस अधीक्षक चन्दौली डॉ अनिल कुमार ने जनपदवासियो से पराली प्रबंधन की अपील करते हुए कहा कि वे पराली को आग न लगाएं और इस बारे में दूसरे किसानों को भी जागरूक करें. उन्होंने कहा कि एनजीटी के नियमों व सरकार के आदेशों की पालन नहीं करने पर पराली जलाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी. क्योकि की पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ पराली जलाने के कारण फसलों में आग लगने की घटनाएँ लगातार घटित हो रही है. कृषि विभाग से सांमजस्य व तालमेल स्थापित कर सभी पराली इकट्ठा कर गौशाला को दान करें या कंपोस्ट के तौर पर उपयोग करें. पराली या फसलों के अवशेष को वेस्ट डिकम्पोजर के माध्यम से खाद बनाकर उसको उपयोग कर सकते है

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